मैं हिंदुस्तान हूँ – मोब, लीनचिंग

लेकिन उन सभी सपूतों में कुछ ऐसे भी थे जिनके खून में मेरे नमक की हलाली न थी  उनके विचारों के अनुसार अब मैं नही रहा मैं उनकी कुंठित विचारधाराओं से मुक्त था

मैं हिंदुस्तान हूँ :- सियासत

एक परिवार जो न जाने कितने ही संस्कृतियों सभ्यताओ  हजारो भाषाओ बोली वेश भूषा खान पान से बना  असंख्य होते हुए भी मुझमे सब एक थे  अनेकता में एकता की मिशाल मैं हूँ तुम्हारा हिंदुस्तान  हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ मगर  आज मैं लहू लुहान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ ! 

मैं हिंदुस्तान हूँ :- इतिहास और शियासत

मैं चाहे जितना भी बयान कर दूँ फिर भी शब्द खत्म हो जाएंगे फिर भी बयान पूरा न होगा मैं हिंदुस्तान हूँ हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं लहू लुहान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ

मैं हिंदुस्तान हूँ- जिहाद, आतंकवाद, दंगा

देखो मुझे मैं तुम सबका हिन्दुस्तान हूँ हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं लहू लुहान हूँ

मैं हिंदुस्तान हूँ

इसकी पूरी सीरीज देश भर में अलग अलग जगहों पर हिंसा में मारे गए सभी लोगो और उनके परिवार को समर्पित।

तोहमत-e-इश्क़

बस एक बात जो कहनी थी वो दिल मे ही रह गयी हाँ मुझे तुमसे इश्क़ है बस इश्क़ है तो बस इश्क़ है।

वो कौन थी…….

हम सभी कभी न कभी सफ़र करते है और उन सफ़र के दौरान कोई हमें ऐसा मिलता है जो याद रह जाता है हमें वो हमारे ज़ेहन में हमेशा एक सफ़र की तरह होता है जो कभी ख़त्म तो नहीं होता लेकिन वक़्त के साथ उसकी तस्वीर थोरी धुंधली हो जाती है !

बग़ावत-अंतिम भाग

अल्लाह ने इंसान के नफ्स को इस बेहतरीन तरीके से बनाया कि वो बुराई और अच्छाई में साफ़ फर्क महसूस कर लेता है, जब कोई इंसान कोई नेक काम करता है तो उसे अन्दर से एक ख़ुशी महसूस होती है एक सुकून वो अपने अन्दर महसूस कर सकता है, और जब कोई इंसान शुरू में किसी बुरे काम का इरादा करता है तो उसके दिल में एक खटक सी पैदा होती है वो खटक बहुत कीमती है, कुरआन हमें बताता है कि जो इंसान दिल की इस आवाज़ की कद्र करता है तो इसमें और ज्यादा बहतरी आती है, और जो इंसान इस आवाज़ की कद्र नहीं करता तो धीरे धीरे यह आवाज़ बंद हो जाती है फिर इंसान उस गुनाह को गुनाह महसूस नहीं कर पाता, अल-कुरआन: यह अल्लाह की हिदायत है जो उसने हर इंसान के अन्दर रखी है यह एक तराज़ू की तरह है जिसमे हर अमल तौल कर देखा जा सकता है यह इतनी कीमती चीज़ है कि अल्लाह ने फ़रमाया है कि जिसने इसे सवारा वो कामयाब हो गया और जिसने इसे दबाया वो बर्बाद हो गया. – (सूरेह 91 शम्स, आयत: 7-10)

बग़ावत-भाग दो

हम सभी की ज़िंदगी मे ऐसा वक़्त या कोई वाकया होता है जिसमे किये गए वादे या कसमे हमे और हमारे नफ़्सो को जकड़ने लगता है ऐसे हालात में जब हम उसपे अपना काबू चाहते है तो वो बाग़ी हो जाते है और अगर हम उन वादों और कसमो की लाज रखना हो तो उन बग़ावत और उन बागियों का सर कुचलना होता है पर इसमें भी हमे ही तकलीफ होती है।