मेरे कलम से…..

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उसकी आँखें

जब भी उसकी आँखों में देखता हूँ तो यूँ खो जाता हूँ जैसे समंदर में बारिश की बुँदे कभी कभी तो यूँ भी हुआ उसके लबो पे मिश्री घुली थी और उसने मेरे लबो को छुआ ____________________________________________________ © 2018 Md Danish Ansari

फ़र्द – व्यक्ति …

ये कैसी दुनिया है ये कैसा सोर शराबा है यहाँ तो फ़र्द ने ही फ़र्द को क़त्ल कर डाला है बहुत रोई यारों वो मुझसे गले मिलकर मैंने कहा अब रोने से क्या होगा जो एक दिल तोड़ दिया तुमने फ़र्द कोई मुझे ऐसा मिला ही नही अभी जिसपे ऐतबार करके अपना दिल सौंप दूँ … पढ़ना जारी रखें फ़र्द – व्यक्ति …

ख़ाक….

जो यादें अगर ख़ाक होती तो फूँक मार के उड़ा देता उन्हें मगर ये तो वो आग है जो सिर्फ मुझे जलाया करती है

Friends & Relationship

आज बड़े दिनो बाद एक पुराने दोस्त के साथ लम्बी ड्राईव पे निकला सुबह 8 बजे घर से निकल चुका था दोस्त ने कहा जहाँ हम जाने वाले है उस तरफ काफी ठंड रहती है

Jasne Eid Miladun Nabi

लोग अक्सर यह पुछते है की नबी तो मुसलमानो के लिए थे तो तुम सब हम सबके नबी क्यों कहते हो ?

मैं क्या लिखूँ

क्या ये लिखूँ की वो मुझे ऐसी लगती है जैसे कोई हूर अभी अभी चाँद की चांदनी में नहा के निकली हो या ये लिखूँ की उसके सूर्ख गुलाबी रुक्सार बिलकुल फूलों की पंखुडी से भी कोमल है