Friends & Relationship

आज बड़े दिनो बाद एक पुराने दोस्त के साथ लम्बी ड्राईव पे निकला सुबह 8 बजे घर से निकल चुका था दोस्त ने कहा जहाँ हम जाने वाले है उस तरफ काफी ठंड रहती है

Advertisements

Aina Hamare Wajud Ka

Scene 1 : “please Dr. Can you diagnose and tell us the gender of the my to be born kid.” If it’s a girl I want it to get aborted. The unborn cried, thinking “is this womb also not safe for me? “ Scene 2: (a loud sound of crying came out of ward) “Dr. … पढ़ना जारी रखें Aina Hamare Wajud Ka

खामोशियाँ……….

जिसकी तलाश करते नही थकी कभी आँखें लगता है आज उसकी तलाश पूरी हो गयी पर लब खामोश है अब भी डर से, कहीं दूर न हो जाएँ ये नज़ारे _______________________________________________________________ मुहब्बत का अशली मज़ा इसमें है की हम उन्हें देखा करें और इबादत का मज़ा तब है जब वो हमें देखा करें इस ज़िन्दगी … पढ़ना जारी रखें खामोशियाँ……….

ज़िन्दगी के रंग……

जीवन के इंद्रधनुषी सफर में हजारो रंग नज़र आते है, परायों को अपना कहनेवाले अच्छों को बुरा कहने वाले कहीँ ना कहीँ मिल जाते है रोज़ सफेद -काले और सतरंगी जिंदगी नज़र आती है जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती है। Source: जिंदगी के रंग (कविता – 5) _________________________________________________________________________________ ये जीवन कहने को तो चार दीन … पढ़ना जारी रखें ज़िन्दगी के रंग……

एक तौफा मेरे प्रेम और अटूट विश्वास का

तेरी रुखसती का वक़्त था और मुझमें खामोशियों का आलम था इन बेचैनियों के बीच ख्याल आया तुझे यादगार तौफा देने का यूं तो अंदर से मैं टूट चुका था मगर फिर भी कुछ जोड़ना चाहता था वो रिस्ता प्रेम सदभाव विश्वास से बनाया था उसे आसानी से टूटने नही दे सकता था इसी ख्याल … पढ़ना जारी रखें एक तौफा मेरे प्रेम और अटूट विश्वास का

खामोशियाँ……

तेरे जाने के बाद अब ये आँखे खामोश हो चुके है दिल के हर जज़्बात अब खामोश हो चुके है। माँ मेरी आँखो में देख कर पढ़ लेती है मेरी हर दास्तां कहती है तेरी हर खुशी रूठ कर खामोश हो चुकी है। कैसे बतलाता मैं तुझे के मेरी आरज़ू और ज़ुस्तज़ु क्या है मेरे … पढ़ना जारी रखें खामोशियाँ……

शहर 2……

शहर इसमें मेरे अस्तित्व का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है। यही मैं जन्मा हूँ यही मैं खेला और पढ़ा हूँ। इसकी सकडको पे न जाने कितने ही बार ठोकर खा के गिरा हूँ। फिर संभला और खड़ा हुआ और आगे बढ़ा चलता गया। ये मेरा शहर है ये हमारा शहर मैं इस शहर का परिंदा … पढ़ना जारी रखें शहर 2……

शहर……

ये जो शहर कभी पराया था अपना सा लगने लगा है बड़ी मुदत्तो बाद हमने शहर को शहर जैसा देखा है न जाने कितने साल गुजार दिए हमने अपनी जिंदगी के अभी तलक हमने इस शहर को ठीक से जाना कहा है ये जो लोग है मुझे भीड़ लगते थे तब यहाँ दम घुटता था … पढ़ना जारी रखें शहर……