वो कौन थी…….

हम सभी कभी न कभी सफ़र करते है और उन सफ़र के दौरान कोई हमें ऐसा मिलता है जो याद रह जाता है हमें वो हमारे ज़ेहन में हमेशा एक सफ़र की तरह होता है जो कभी ख़त्म तो नहीं होता लेकिन वक़्त के साथ उसकी तस्वीर थोरी धुंधली हो जाती है !

बग़ावत-अंतिम भाग

अल्लाह ने इंसान के नफ्स को इस बेहतरीन तरीके से बनाया कि वो बुराई और अच्छाई में साफ़ फर्क महसूस कर लेता है, जब कोई इंसान कोई नेक काम करता है तो उसे अन्दर से एक ख़ुशी महसूस होती है एक सुकून वो अपने अन्दर महसूस कर सकता है, और जब कोई इंसान शुरू में किसी बुरे काम का इरादा करता है तो उसके दिल में एक खटक सी पैदा होती है वो खटक बहुत कीमती है, कुरआन हमें बताता है कि जो इंसान दिल की इस आवाज़ की कद्र करता है तो इसमें और ज्यादा बहतरी आती है, और जो इंसान इस आवाज़ की कद्र नहीं करता तो धीरे धीरे यह आवाज़ बंद हो जाती है फिर इंसान उस गुनाह को गुनाह महसूस नहीं कर पाता, अल-कुरआन: यह अल्लाह की हिदायत है जो उसने हर इंसान के अन्दर रखी है यह एक तराज़ू की तरह है जिसमे हर अमल तौल कर देखा जा सकता है यह इतनी कीमती चीज़ है कि अल्लाह ने फ़रमाया है कि जिसने इसे सवारा वो कामयाब हो गया और जिसने इसे दबाया वो बर्बाद हो गया. – (सूरेह 91 शम्स, आयत: 7-10)

बग़ावत-भाग दो

हम सभी की ज़िंदगी मे ऐसा वक़्त या कोई वाकया होता है जिसमे किये गए वादे या कसमे हमे और हमारे नफ़्सो को जकड़ने लगता है ऐसे हालात में जब हम उसपे अपना काबू चाहते है तो वो बाग़ी हो जाते है और अगर हम उन वादों और कसमो की लाज रखना हो तो उन बग़ावत और उन बागियों का सर कुचलना होता है पर इसमें भी हमे ही तकलीफ होती है।

Aina Hamare Wajud Ka

Scene 1 : “please Dr. Can you diagnose and tell us the gender of the my to be born kid.” If it’s a girl I want it to get aborted. The unborn cried, thinking “is this womb also not safe for me? “ Scene 2: (a loud sound of crying came out of ward) “Dr. … पढ़ना जारी रखें Aina Hamare Wajud Ka

बग़ावत-भाग एक

बग़ावत ये वो लफ्ज़ है जो तेरे मेरे दरमियां मौजूद हर वफादारी को खत्म करने की तैयारी है पर मेरा वादा है कि हर मुसीबतों से मैंने जैसे निपटा है वैसे ही अब इससे भी निपटूंगा मुझे यकीन है मेरे अल्लाह रबूल इज्जत पर वो इंसाफ करेगा तेरे मेरे हक़ में आमीन।

तेरा ज़िक्र…….

ये जो तेरा जिक्र है ये वो इत्र है जिससे मैं बार बार बहकता हूँ तेरी ही याद में हर पल तड़पता हूँ। पागलपन की हद से आगे जा कर तुझसे मुहब्बत करते रहने की जो जिद्द है तो बस है इसे न तो मैं पलट सकता हूँ और न ही तू।

कुछ न कहो…….

***kuch na kaho*** ye khwahish hai ki teri yaad mujh me hamesha mahakti rahe uska har ehsaas mujh me samata rahe kuch kahaniya aisi hoti jo bhula di jaati hai or kuch aisi jise chah ke bhi aap bhula nahi pate ise aap alag alag nazariye se alag tarike se dekh sakte hai ya mehsus kar sakte hai bas yahi hai ***kuch na kaho***

रमज़ान …….

रमज़ान कुछ मेरे लिए इस तरह है जैसे साल भर रोज़ा रहा हूँ इस महीने को पाने के लिए कुछ लिख दिया है मैंने कोई गलती हो जाये लिखने में तो अल्लाह माफ़ करना !