गुफ़्तगू- मस्ताना आशिक़ और अंसारी 2

साथ रहने का वो बार बार कसमे खाते है फिर उनका झट से मुकर जाना हमें बड़ा अच्छा लगता है मुझे डर ही नहीं अंसारी के वो चले जायेंगे एक दिन मुझे छोड़ कर वो मुझे अपना मान बैठी है मैं उसे मान बैठा ये एहसास बड़ा अच्छा लगता है

गुफ़्तगू- मस्ताना आशिक़ और अंसारी

बताओ परवाने इश्क के नाम पे जिस्म का खेल किस किस ने खेला है  सुना है ये मोहब्बत का व्यवपार इस पूरी दुनिया में बहुत फैला है 

मैं हिंदुस्तान हूँ – मोब, लीनचिंग

लेकिन उन सभी सपूतों में कुछ ऐसे भी थे जिनके खून में मेरे नमक की हलाली न थी  उनके विचारों के अनुसार अब मैं नही रहा मैं उनकी कुंठित विचारधाराओं से मुक्त था

मैं हिंदुस्तान हूँ :- सियासत

एक परिवार जो न जाने कितने ही संस्कृतियों सभ्यताओ  हजारो भाषाओ बोली वेश भूषा खान पान से बना  असंख्य होते हुए भी मुझमे सब एक थे  अनेकता में एकता की मिशाल मैं हूँ तुम्हारा हिंदुस्तान  हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ मगर  आज मैं लहू लुहान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ ! 

मैं हिंदुस्तान हूँ :- इतिहास और शियासत

मैं चाहे जितना भी बयान कर दूँ फिर भी शब्द खत्म हो जाएंगे फिर भी बयान पूरा न होगा मैं हिंदुस्तान हूँ हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं लहू लुहान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ