कुछ मन में है

कुछ को तलाश है वक़्त में कोई वक़्त मुनासीब कुछ युँही पसीजते है धड़कनो से धड़कते हूए

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बंधुआ मजदूर

भोर हुई नैनो से पलके उठ गयी फिर भी नैना सोई रही पग मोरे भुइयाँ पे तेजी से सरपट दौड़ रहे है मगर