ज़िन्दगी – LIFE Part 2

IMG_20171118_001845

मैं भी सबकी तरह संघर्ष कर रहा था अपने भविष्य की लिए उस भविष्य के लिए जो कभी है ही नहीं यह इस लिए कह रहा हूँ की वस्ताविकता में भविष्य होता ही नहीं भविष्य एक कल्पना मात्र है जो ऊमीद से बनती है और फिर उस ईमारत के ढ़ह जाने का डर हमे उस भविष्य की लिए इस संघर्ष में झोंक देता है किसी इंधन की तरह हम वर्तमान जलते रहते है धूँ धूँ करके चारो तरफ इतना धुआँ है की कुछ नज़र ही नहीं आता , फिर एक दिन अचानक एक जोरदार हवा का झौका आता है और मेरे आस पास मौजुद कोहरे को साफ करता है और फिर मेरी नज़र तुमपे और तुम्हारी नज़र मुझपे पड़ती है और फिर कुछ देर के लिए ये दुनिया हम दोनो से जुदा हो गयी दिमाग किसी मशीन की तरह जोड़ घटाओ करने लगा की तुम्हे कहाँ देखा है कब मिला है और ना जाने क्या क्या और एक दिल है की बस शांत हो गया वो दिल जो हमेशा व्याकुल रहता था अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर अब वह बिलकुल शांत था बिलकुल एक झील की तरह वो झील ज़िसमे ना जाने हर रोज़ कितने पत्थर गीरते और लहरे पैदा करते जो उसे पहले से कहीं ज्यादा उथल पुथल कर डालता , मैं नहीं जानता की जो मेरी स्थिती थी उस वक़्त क्या वही तुम्हारी भी थी या फिर तुम कुछ और सोच रही थी विचार रही थी , और फिर जिस तरह तुम सामने आयी वैसे ही चली भी गयी मगर मुझमे बहुत कुछ बदल भी गयी यह बदलाओ मुझमे पहले से था या तुम अभी कर गयी थी जब इसके बारे में सोचता हूँ तो यह पाता हूँ की यह सब तो पहले से ही मुझमे था तुम्हारी तलाश करने की ईक्षा तुमहारे प्रति जो ये आकर्षण है यह पल भर में नहीं जन्मा बल्की पूरा एक बचपन है यह और बात थी की यह आकर्षण वक़्त के साथ अपनी दिशा बदल लिया शायद इस लिए क्योकि वह खुद को बचाना चाहता था या फिर यह भी हो सकता है की वह मुझे बचाना चाहता था चाहे जो भी हो मगर अब मेरी तलाश सिर्फ तुम हो फिर तुम्हारे आस पास रहते हुएे तुम्हे जाना और आखिर कार तुम खुद ही एक दिन मेरे घर चली आयी यह ऐसा था जैसे ईश्वर ने खुद तुम्हे मेरे घर पर डाक भेज दिया हो मेरी ख़ुशी का पिटारा जो बचपन में मुझसे खो गया था या फिर दूर कर दिया गया वो तुम हो जिससे मुझे बेतहासा ख़ुशी मिलती है , मगर सवाल यह भी था के क्या तुम्हे भी वो महसूस होता है जो मैं तुम्हारे प्रति करता हूँ मगर मेरे हर बार पुछने के बावजुद कभी तुमने ईजहार ही ना किया बस हर बार हंस के टाल जाती और फिर एक रोज़ तुम फिर चली गयी बिना कुछ कहे बिना कुछ बताये पिछे छोड़ गयी तो बस एक खत और उस खत में चंद अल्फाज मगर तुम्हारा वो खत मुझे ख़ुशी देता है और ऊमीद भी और मुझे यकीन है की एक ना एक दिन मैं तुम्हे तलाश लूँगा और फिर तुम्हे कहीं नहीं जाने दूँगा मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता के तुम मेरी होगी की नहीं मैं बस इतना चाहता हूँ की बाकी की ज़िन्दगी में तुम मेरे पास रहो और उम्र के सभी पडाओ से होते हुएे एक दिन हम बूढे हो जाये और बस एक दिन यह सांस आहिस्ते से बस चुप चाप खामोश हो जाये और यह जब हो तो तुम मेरे करीब रहना बस इतना ही

तुम्हारे वो लफज जो हम दोनो के लिए कहे….

IMG_20171118_002040IMG_20171118_002032

तुमसे मिल के जो ख़ुशी मिलती है मुझे
ऐसी ख़ुशी मुझे कहीं और कहा हाशिल

डर लगता है मुझे की अपनी ख़ुशी की खातिर
तेरी खुशियों को जला कर राख ना कर डालूँ

Image Credit:- Google

____________________________________________________________________________________________

© 2017 Md Danish Ansari

Advertisements

4 विचार “ज़िन्दगी – LIFE Part 2&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s