My First Crush & Last

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जब मैंने उसे पहली बार देखा तो वह स्टेज पर खड़ी थी और मैं स्टेज के परदे को पकडे हुए किनारे पर खड़ा था हमारे स्कूल में वार्षिक उत्सव मनाया जा रहा था जिसमे वो भी भाग ली थी एक डांस में वो बहुत घबराई हुई थी शायद यह उसका ये पहला डांस था जिसे वह सबके सामने स्टेज पर करने वाली थी वह घबराई हुई सी स्टेज की बिच में खड़ी हो गयी मैंने पर्दा खीचते हुए उससे कहा आल द बेस्ट वह बिना पीछे मुड़े ही सुक्रिया कह दी म्यूजिक स्टार्ट हुआ और वह डांस की उसका डांस बहुत अच्छा था सभी ने जोर जोर से उसके लिए ताली बजा कर उसका होसला बढाया ! ये हमारी पहली मुलाकात थी शायद मुझे यहाँ ये कहना चाहिए की ये मेरी पहली मुलाकात थी क्योकि उसने तो मुझे नोटिस तक नहीं किया ! धीरे धीरे वक़्त बीतता गया और मैं भी अब स्कूल में काफी ज्यादा फेमस हो गया ये शायद अपने मुँह मिया मिठ्ठू जैसी बात हो मगर मैं सच कह रहा हूँ इसकी वजह यह थी की हमारी प्रिंसिपल बहुत स्ट्रीक थी वह गलती करने पर सजा देने से कभी नहीं चुकती ! मैं उसका खास स्टूडेंट था क्योकि मैं स्कूल के नियम नहीं तोड़ता था सबको अनुशासन में रहने के लिए कहता था ! यही वजह थी की मुझे क्लास कैप्टन बनाया गया ! इसी तरह मैं आगे बढ़ता गया फिर सांस्कृतिक सचिव मैं एक तरफ जहा सबको अनुशासन में रहने के लिए कहता वही उसके नियम तोड़ने पर उसे कुछ भी नहीं कह पाता ! वो और मैं बिलकुल एक दुसरे के विपरीत थे वह रूल्स तोडती थी जबकि मैं रूल्स फॉलो करता था वह मस्त मौला थी वह काफी बोलती थी जबकि मैं कम ही बोलता था ऐसा नहीं था की मेरे दोस्त नहीं थे या कम थे लेकिन मैं ज्यादा बात नहीं करता था मेरी पूरी कॉपी क्लास में घुमती और सबसे आखरी में जमा होती मैडम सर के पास सब कुछ सही था बस एक चीज सही नहीं थी मैं मैथ्स में था और वो आर्ट्स में जिसकी वजह से मैं उसे बहुत कम ही देख पाता लेकिन रिसेस और खाने की छुट्टी मेरे लिए सबसे अच्छा समय हुआ करता था क्योकि मैं उसे हमेशा अपने क्लास के बहार खड़े होकर उसे देखता रहता वो अपनी सहेलियों के बिच मशगुल रहती बिना मेरी और किसी तव्वजू के और ये होता भी कैसे वह तो जानती ही नहीं थी की कोई उसे देखता भी है हर रोज चुपके चुपके ! एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे पकड़ लिया बोला और भाई क्या देख रहा है मैंने हँसकर टालने की कोशिश की मगर वह पूछता रहा आखिर में मैंने उससे कह दिया की मैं उसे देख रहा हूँ ! वह बोला अरे वो तो मेरी दोस्त की सहेली है आ जा तुझे मिलाता हूँ मैंने मना कर दिया मैं भी कितना बेवकूफ था की हाँथ आये ऑफर को ठुकरा दिया खैर ! एक दिन जब मैं उसे देख रहा था तो वह अपनी सहेलियों के बिच थी और उसकी सभी सहेलियां उससे कुछ कह कर उसे बार बार तंग कर रही थी वो सब मेरी तरफ देखती और हँस पड़ती वह भी खूब हँस रही थी उनके साथ मैं समझ नहीं पा रहा था आखिर ये हो क्या रहा है आज ! बाद में मेरा दोस्त आया पीछे से और बोला और क्या हो रहा है अरे मैं तो भूल ही गया था दूर दूर से भाभी को देख रहा है मेरा भाई ! अब भी ये सारी बाते जब याद आती है तो बहुत हँसता हूँ की किस तरह से हम ये तेरी वाली ये मेरी वाली वो उसकी भाभी वो इसकी भाभी किया करते थे कितनी बेवकूफी भरी हरकते थी ये सब लेकिन मजेदार थी ! यार मुझे आज ये समझ नहीं आ रहा की कभी वह मेरी तरफ देखती नहीं थी आज इसी तरफ देख देख कर हंसी जा रही है ! भाई मैंने अपनी दोस्त को बताया और उसने उसे बताया जैसे ही मैं ये सुना मैं दौड़ पड़ा उसे मारने वह दिन यूँ ही हंसी मजाक में गुजर गया ! मैं बारह्वी क्लास में चला गया और वह भी, इसी बिच कई कई नए छात्र और छात्रा भी आये उनमे से एक था राकेश जो उसी की क्लास में आया वह स्मार्ट था और बिलकुल माचो मेन धीरे धीरे उनकी दोस्ती हो गई बाद में मेरे दोस्त ने मुझसे कहा यार वो तो तेरी वाली के पीछे है और तू फट्टू अभी तक उससे दोस्ती भी नहीं कर पाया हम लोगो को कहता है बड़ा  प्रिंसिपल से मत डरो और खुद एक लड़की से डर रहा बात करने से अबे जा उससे दोस्ती का हाँथ बढ़ा इससे पहले वो लड़का उसे अपनी राह पे ला ले ! सच कहूँ तो वह बिलकुल सही कह रहा था मैं किसी से नहीं डरता था सिर्फ जब उससे बात करने की बारी आती तो पता नहीं क्यों मेरे पैरो तले ज़मीं खिसक जाया करती थी ऐसा भी नहीं था की मेरी लड़कियों से दोस्ती नहीं थी बल्कि पुरे स्कूल में सबसे ज्यादा लड़कियों की दोस्ती मुझसे ही थी इसी लिए सब मुझे कृष्ण भी कहते थे चिढाने के लिए लेकिन बस एक वो ही थी जिससे मैं अब तक एक लफ्ज भी नहीं कह पाया था ! वह लड़का बार बार नियम तोड़ता और मुझे बार बार उसे वार्न करना पड़ता मैं अच्छी तरह जानता था की वह उसका अब दोस्त बन गया है हर समय उसके साथ चिपके हुई जब भी वह नियम तोड़ता और मैं वहाँ होता तो उसे प्रोटेक्ट करने वो वहाँ हुआ करती थी और यही वजह थी की मैं हर बार उसकी शिकायत नहीं कर पाता क्योकि वह उसके साथ होती ! मेरे दोस्तों के बहुत कहने पर मैं बहुत हिम्मत जुटा पाया उससे सिर्फ यह कहने की कि क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी ये बात मैं स्कूल में नहीं कहना चाहता था वरना आग की तरह यह बात फेल जाती इसी लिए मैंने छुट्टी होने के बाद उसे रास्ते में ये बात कही उसका घर मेरे घर से पहले पड़ता था हम दोनों का रास्ता एक ही था मैं तेजी से अपनी साइकिल दौड़ा कर उस तक पंहुचा और उसे रुका कर बस इतना कह पाया की क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी कोई जल्दी नहीं है मुझे तुम मुझे अच्छे से सोच कर कल तक बता देना और मैं वहाँ से चले गया ! आप सोच भी नहीं सकते इतनी सी बात कहने के लिए मुझे हिमालय से भी ज्यादा बड़ा होसला जुटाया था ! रात भर मुझे चैन नहीं था बस ये सोचते हुए की उसका जवाब हाँ होगा की ना अगले दिन स्कूल गया वह नहीं दिखी दुसरे दिन भी वह नहीं दिखी तीसरे दिन वह स्कूल आई फिर छुट्टी होने पर मैं रस्ते पर ही उसे रुका कर मैंने उससे पूछा मैंने तुमसे कुछ पूछा था तो क्या जवाब है तुम्हारा क्या तुम मुझे अपना दोस्त बनाओगी उसने एक झटके में कहा कोई दोस्त वोस्त नहीं बनाना मुझे इन चंद लफ्जो ने मेरे हिमालय जैसे आत्म विश्वास को एक ही झटके में धरासाई कर दिया ! ऐसा क्या है उसमे जो तुम उसे अपना दोस्त बना सकती हो पर मुझे नहीं, तुम खुद की उससे बराबरी मत करो वह कहा तुम कहा अपनी शकल देखा है आईने में उसे देख और तुझे देख ! मैं इसके बाद कुछ और न कह सका ! मैं चुप चाप वहाँ से जाने लगा रास्ते भर मेरे आँखों से आंसू निकल रहे थे मैं पूरी रफ़्तार से अपनी साइकिल भगा रहा था ताकि मेरे दोस्त मेरे पीछे जो आ रहे थे वो मुझे इस हालत में न देख ले घर में आते साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया ! माँ घबरा गयी वो दरवाजा पीटने लगी क्या हुआ गुड्डू मैं अपना मुँह तकिये से दबाये हुए बस रोया जा रहा था बहुत देर से वो दरवाजे पिटे जा रही थी इतने मैं छोटी बहिन भी आ गयी वो भी आवाज लगाने लगी आखिर में मैंने खुद को थोरा सँभालते हुए बस इतना कहा मेरी तबियत ठीक नहीं है मैं सोना चाहता हूँ ! अरे तो दरवाजा तो खोल मुझे देखने दे कुछ हुआ है क्या किसी ने कुछ कहा क्या वो बार बार मुझसे पूछते रहे मैं कुछ नहीं कह रहा था बस तकिये से अपना मुँह दबाये रोता रहा काफी देर बाद मैंने पहली बार अपनी माँ को चिल्ला कर कहा , एक बार कह दिया न मेरी तबियत ठीक नहीं तो समझ नहीं आता क्या मेरी बात मुझे अकेला छोड़ दो मैं सोना चाहता हूँ क्यों बार बार दरवाजा पिट कर मुझे परेशां कर रहे हो ! इसके बाद वो कुछ देर तक बोलते रहे फिर वह चले गए मैं रोता रहा और रोते रोते सो गया रात हो गयी करीब ग्यारह बजे मेरी आँख खुली और मैं दरवाजा खोल के सीधे मुँह धोने चला गया जब अन्दर आया सब मुझे देख रहे थे भाई बहिन माँ पिता जी माँ पिता जी पूछने लगे क्या हुआ तुझे आज रूम में क्यों घूंसा हुआ था बंद करके खुद को, कुछ नहीं मेरी तबियत ठीक नहीं थी बस इसी लिए सोना चाहता था कोई मुझे परेशां न करे इस लिए बंद कर दिया दरवाजा ! तू रो रहा था माँ ने कहा, नहीं तो किसने कहा तेरी आँखे कह रही है बेटा देखो तो कैसी लाल दिख रही है वो कुछ नहीं बस बॉल लग गयी थी इसी लिए , हमें बेवकूफ समझ रखा है सच बता क्या हुआ पिता जी ने जरा कड़क होकर मुझसे पूछा इतने में माँ आगे आ गयी और उनका हाँथ थमते हुए इशारा कर गयी ! वो फूटबाल लग गया था इस लिए लाल हो गया अच्छा चल तू कहता है तो मान लेता हूँ जा खाना खा ले ! मेरा जी तो नहीं था मगर पिता जी घर पे थे तो खाना पड़ा जैसे तैसे एक रोटी खाया और फिर अपने कमरे में चला गया !

Story Be Contineu …….

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© 2017 Md. Danish Ansari

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7 विचार “My First Crush & Last&rdquo पर;

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