रक्षा बंधन ……

20664623_500547583611788_7367021174242162750_n

हर रक्षा बंधन के दिन मैं उनकी राह देखता हूँ

इस दिन किसी के साथ मैं कही नहीं जाता हूँ

ये सोच कर पता नहीं कब बहना आ जाये

मुझे न पा कर कहीं खाली ही न लौट जाये

मेरी राखी उनके राखी के बगैर अधूरी है

मेरी कलाई उनके प्रेम बंधन से अधूरी है

वैसे तो हर बात पे उनसे लड़ता हूँ झगड़ता हूँ

लेकिन यह भी सच है मैं उनकी परवाह करता हूँ

जो बाँध दिया बहन ने भाई के कलाई में प्रेम का बंधन

 वो रेशम की डोर भी रब से दुआ करती है

खुश रहे आबाद रहे जहाँ भी तु रहे खुशहाल रहे

भाई के आँखों में चमक है उसके प्रति प्रेम का

 दुआ ही दुआ निकलती है इस दिल से हर वक़्त

नामजो के बाद हर दुआ में भी तुम्हारा जिक्र रहा है

खुदा से हमेशा तेरे खुशहाली की दुआ की मैंने

 

उम्र भर की हिफाजत का वादा लिया तुमने बहन

सच तो यह है अक्सर तेरी दुआएं मेरे काम आती है

तू हंसती है तो घर रोशन रहता है तेरी उदासी से

घर बेनूर सा लगता है

माँ से घर पे उजाला हुआ करता है बहिन से

वो घर और भी खुबसूरत सा बनता है

 

कुछ भाई ऐसे भी है जो सीमा पर मौजूद रहे

कुछ बहन ऐसी भी है जिनकी राखी अब भी इंतज़ार में है

वो कह गया था रक्षा बंधन के दिन घर आऊंगा

पर अपने फ़र्ज़ की खातिर वह अब भी सीमा पे खड़ा है

ऐसे भाइयों को और उनकी बहनों को सलाम

इनकी यह छोटी बड़ी हर क़ुरबानी हम पर कर्जा है

इस क़र्ज़ से पार पाना अभी हमने नहीं सिखा है

जितना लिखूं उतना कम है बस इतना सलाम

सलाम है देश के हर वीर को सलाम है हर बहन को

_________________________________________________________________________________________

© 2017 Md. Danish Ansari

Advertisements

12 विचार “रक्षा बंधन ……&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s