मैं हिंदुस्तान हूँ :- सियासत

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मैं हिंदुस्तान हूँ

सियासत

मुग़ल के राज में मैं सोने की चिड़िया बन

ऊँचे आसमान में गोते लगता रहा

फिर मुझ पर पड़ी एक शिकारी की नज़र

उसने साजिस रची मेरे अपनों को बहलाया

एक दुसरे से लडवाया और खुद को ताकतवर बनाया

`जो अब तक कभी न हुआ था मेरे अन्दर

वो उसने करके दिखाया

मुझे कई हिस्सों में बाँट खाया

धर्म जाती भाषा रहन सहन विश भूषा

प्रथा सीमा लेखन बोली और न जाने

किन किन आधारों पर तुम्हे भटकाया

फिर तुमने खुद ही अपने हांथो से

मेरे ही अंगो को टुकड़े टुकड़े कर डाला

तुमने मुझे बाँट डाला यह विभाजन

अंतिम नहीं यह विभाजन अंतिम नहीं

अब यह सियासत का दौर था

अपने स्वार्थ सिध्धि का दौर था

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वक़्त के साथ मेरे कुछ महान पुत्रो ने

मेरा हक अदा करने की कोशिश की

इस कोशिश में अपनी जान मुझे दी

क्रांति की जवाला जल उठी उसके लहू के तेल से

उसके सिने की ज्वाला से वह भड़क उठी

वक़्त के साथ शिकारी में भी बदलाव कुछ तो आया

उनमे से कुछ ने मुझे संभाला

मेरे जख्मो पे मरहम लगाया

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कुछ ने हिंसा का रास्ता चुना तो

कुछ ने अहिंसा का रास्ता अपनाया

और इस तरह आज़ादी का दोनों ने आगाज़ कर डाला

दोनों का मकसद एक ही था बस रास्ते अलग थे

उन रास्तो का मिलन आज़ादी पर होना था

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एक पुत्र ऐसा भी जन्मा मेरी गोद में

जिसने संपूर्ण विश्व को चौका डाला

अहिंसा का मार्ग तो बहुतो ने चुना

कोई कुछ दूर चला तो कोई भटक गया

लेकिन वह दुबली पतली सी काया

अहिंसा का दृढ निश्चय था जो पाया

उससे सारा विश्व तो था ही मैं भी चकित था

हाँ वो हिन्द का गाँधी हैं

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जिसे दुनिया और तुम महात्मा गाँधी से आज जाना

कभी वह साधारण सा व्यक्ति मात्र था

उसने कहा था हिंसा करने के लिए सिर्फ क्रोध चाहिए

अहिंसा करने के लिए शांत मन और दृढ निश्चय चाहिए

और वह उसमे था भी उस चमत्कारी को सबने देखा

मैं हिंदुस्तान हूँ और वह मेरी गोद में खेला

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तुममे से कुछ ने आगे बढ़ कर

नेतृत्व किया तुम्हारा

इस तरह वह बन गया रहनुमा तुम्हारा

पर वह नेता सच्चा था अच्छा था

आज के तुम्हारे आका की तरह अँधा और बहरा नहीं था

वह कर्म योगी था कर्म करता था फिर बोलता था

आज नेता बोलता है बाद में कुछ करता है

क्रांति की तलवार ने मुझे आजाद किया

कुछ क्रांतिकारी शहीद हुए कुछ अब भी रह गए

मेरी बुनियाद को फिर से मजबूत करने के लिए

पर अब मैं वो सोने की चिड़िया नहीं रहा

जिसमे जोश था स्फूर्ति थी चमक था

अब मैं थका हारा दुखियारा एक परिंदा था

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मेरे सपूतो ने कसम खायी मिलकर

मुझे फिर से वैसा ही बनायेंगे बल्कि

मुझे पहले से बेहतर बनायेंगे

उन्होंने यह किया भी जिस ज़मी पे कभी

सुई तलक न बनती थी आज वहाँ रोकेट बनते है

जहाँ चाँद को छूना सिर्फ सपनो में था

वो आज चाँद पे अपनी मशीन उतारते है

जिस मंगल को तुमने सिर्फ राशियों में सुना था

आज वहाँ भी तुम मेरा परचम लहराते है

बहुत से उद्योग हुए हुई मशीन चल पड़ी

मैं हिंदुस्तान पूंजीवाद की दौड़ पे दौड़ पड़ा

खुद दौड़ा इतना दौड़ा की विश्व

आज मुझे नज़र अंदाज़ करने की जुर्रत नहीं करता

यह सब तुम सब की मेहनत का ही नतीजा है

यह सब तुम सब के राष्ट्र प्रेम का ही नतीजा है

इन सभी अच्छी घटनाओ दर घटनाओ के बिच

एक छेद हमेशा बनता रहा

जो वक़्त के साथ बढ़ता और पलता रहा

तुमने शायद इसे महसूस नहीं किया हो

पर मैं उसपर लगातार नज़रे जमा रखता रहा

वो आज़ादी के वक़्त जन्मा क्रांति की मशाल लिए

पर मैंने जैसा तुमसे कहा

कुछ लोग मेरी आज़ादी के लिए लड़े

और कुछ आज़ादी तो चाहते थे पर सिर्फ दुसरो से

वो मुझे खुद की बेड़ियों से जकड़ना चाहते थे

वो चाहते थे की मैं उनकी तरह रहूँ

वो जैसा चाहे मैं वैसा बनू पर यह संभव नहीं था

मुझे यह स्वीकार ही नहीं था

उन्होंने मेरे सपूतो के खिलाफ साजिस की

और जिन्होंने मुझे गुलाम बनाया

उससे सौदेदारी की, संघर्ष हुआ बहुत हुआ

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यूँ लगा सब कुछ धुवां धुवां हुआ

लेकिन मेरे सपूतो ने मुझे संभाला

और स्वतंत्र देश का स्वतंत्र संविधान रच डाला

बहुत ही संघर्ष हुआ इसके रचनाओ और रचनाकारों में

कोई किसी पे सहमत तो किसी पे असहमत

इसके बावजूद तमाम असहमतियों के बिच

उन सबने मिलकर एक सहमती जाता ही डाला

तब मुझे मेरा एक नया नाम मिला

धर्म निरपेक्ष राष्ट्र एक संघ जो बेमिशाल है

एक परिवार जो न जाने कितने ही संस्कृतियों सभ्यताओ

हजारो भाषाओ बोली वेश भूषा खान पान से बना

असंख्य होते हुए भी मुझमे सब एक थे

अनेकता में एकता की मिशाल मैं हूँ तुम्हारा हिंदुस्तान

हाँ मैं हिंदुस्तान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ मगर

आज मैं लहू लुहान हूँ मैं हिंदुस्तान हूँ !

 

आगे जारी है …………………………

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© 2017 Md. Danish Ansari

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2 विचार “मैं हिंदुस्तान हूँ :- सियासत&rdquo पर;

  1. अंसारी जी आप जो लिखा है बहुत सटीक लिखा है। जो मैं लिखना चाहती थी या समाज को देख मन तड़प उठता है उसे आप पूरा कर रहे हैं। आज मुझे आप को बेटा कहने पर फक्र महसूस हो रहा है। ऐसे ही लिखते रहिये। 👍👌👏💐

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