तोहमत-e-इश्क़

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उसने हमसे किनारा क्या किया
सारी दुनिया ने उस पर तोहमत लगा दिया
तू बेवफा है तू क़ातिल है
तू बेवफाई की मूरत है
ए लोगो मेरे महबूब पे कोई तोहमत न लगाओ
मैं जानता हूँ उसकी हर मजबूरी
किस दौर से गुज़र रही है
उसकी मोहब्बत उसकी मजबूरी
मैं उसका आशिक़ हूँ वो मेरा मेहबूब
अब इसमें मुझे किसी और की बादाखलत
बर्दास्त नही है
मंजूर है मुझे उसका हर फैसला
चाहे तो साथ दे या छोड़ दे
उससे न कोई गिला है ना कोई शिकवा
न कोई शिकायत मुझे
तो बेवफाई का इल्जाम ख़ामख़ा उसे क्यो देना
वो मेरी ज़िंदगी मे आयी थी अपनी मर्जी से
और गयी भी अपनी मर्जी से
इसमें मेरा न कोई अख्तियार रहा
ऐसा नही की मुझे उसकी परवाह नही है
ऐसा नही है कि मुझे उसकी चाह नही है
बस मेरी दीवानगी कुछ ऐसी है
के खामोश होकर सारी मोहब्बत लुटा दिया करते है
उसे खबर है मेरी हर ज़ज़्बात का
कुछ भी तो उससे छुपा नही
वो मुझे, मेरे खुद से ज्यादा जानती है
मैं उसे, उसके खुद से ज्यादा जानता हूँ
मैं उसे समझता हूँ वो मुझे समझती है
उसके सारे राज़ मुझे पता है
और मेरे सारे राज़ उसे
लोग जब देखते है हमे तो फर्क ही नही कर पाते
किरदार कुछ इस तरह अपना मिलता है
न तू बेवफा है और न तूने कोई बेवफाई की
बस एक बात जो कहनी थी वो दिल मे ही रह गयी
हाँ मुझे तुमसे इश्क़ है बस इश्क़ है तो
बस इश्क़ इश्क़ इश्क़ बस तुम्ही से इश्क़ है।
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© 2017 Md. Danisah Ansari
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15 विचार “तोहमत-e-इश्क़&rdquo पर;

    1. अंसारी जी कल से जितने पोस्ट पब्लिश किये हैं उस पर कमेंट बॉक्स नहीं दिख रहा है बहुत कोशिश की कुछ समझ में नहीं आया इसलिए कमेंट नहीं आ रहा है। क्या कोई सेटिंग्स में ऐसा कुछ सेट हो गया है। आप को पता हो तो प्लीज हेल्प कीजिए। बहुत मेहरबानी होगी।

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