वो कौन थी…….

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मीटिंग रूम से निकल कर हम सब रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़े। मैंने अपनी अब तक कि जिंदगी में पहली बार प्लेटफार्म के दूसरी तरफ से ट्रेन पर चढ़ा था मैं बहुत नर्वस था ये पहला अनुभव जो होने जा रहा था। भारत में ज्यादातर रेल पे दोनों ही दरवाजो से लोग ताबड़तोड़ चढ़ते है और उतरते है जो बेहद बेतरतीब होता है इसमें कई बार लोग घायल भी हो जाते है रेल मंत्रालय को चाहिए कि वह बोगी के दोनों तरफ के दरवाजो पे एक से अंदर और दूसरे से बाहर जैसी सुविधा कर देनी चाहिए  इससे थोड़ा लोगो को सुविधा भी होगी। ट्रैन आई और हम उसपे चढ़ गए सीट भी मिल गई तभी एक लड़की की आवाज़ आयी जो ट्रैन से उतरने की कोशिश कर रही थी लेकिन लोग थे कि बस धड़ाधड़ चढ़े जा रहे थे वह लोगो को लगातार चिल्ला रही थी अरे मुझे उतरने तो दो लेकिन लोग थे कि बस चढ़ जाओ खैर आखिर वह उतर गई। उससे ध्यान जब हटा तो मेरे सामने एक लड़की बैठी थी सावली सी न तो वो बहुत ज्यादा खूबसूरत थी और न ही बदसूरत की उसकी तरफ कोई देखे भी नही वैसे मेरा मानना है कि बदसूरती में भी खूबसूरती होती है अगर आप देख सके तो। उसके बाजू में एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे थे। हम इंसान भी अजीब है जब ट्रेन नही आई थी तो ये मन में मना रहे थे कि ट्रेन कब आएगी ट्रैन कब आएगी और जब ट्रेन आ गयी तो मैं कब चढ़ूंगा की रट जब चढ़ गए तो सीट मिलने की रट और सीट मिल गयी तो ट्रैन कब चलेगी की रट मतलब ये है कहना का की आज इंसान थोड़ी देर के लिए भी एक जगह रुकना नही चाहता वो सब्र नही करना चाहता वो बेसब्र हो चुका आधुनिक दुनिया का यही साइड इफ़ेक्ट की हम बेसब्र हो चुके क्या छोटे क्या बड़े सब इस आधुनिक घड़ी के अंदर सुइयों से आगे दौड़ रहे है ताकि कुचले न जाये। खैर आखिरकार मेरे सभी साथी ट्रैन में चढ़ चुके थे सीट भी मिल गयी मेरी नज़र जब जब सामने बैठी उस लड़की पे पड़ती मैं यही सोचता रहता कि मैंने इसे कहा देखा है मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उससे मिला हूँ कही। आखिर मुझसे रहा नही गया और ये बात मैंने अपने साथी से कहा जो मेरा स्कूल फ्रेंड भी है तो वो बोला पूछ लेते है मेरे मना करने से पहले ही वह उससे पूछ बैठा। मैडम आप कहाँ जा रहे है? …….कोरबा। आप वही रहती है ? जी हाँ। हम लोग भी कोरबा से ही है। इतने में वो बुजुर्ग आदमी हमसे पूछ बैठा बाबू मन तोमन का काम करथो? मेरा दोस्त थोड़ा मजाक करने के लिए सीधे बोल दिया हम लोग सीबीआई है। उसके ये बोलते ही मैं हंस पड़ा और वो लड़की भी मुँह फेर के मुस्कुराने लगी। असल मे हम सब ड्यूटी ड्रेस में थे तो थोड़ा सा फील भी आ गया होगा उस बुजुर्ग आदमी को मैंने बीच मे बात काटते हुए बोला। ये मजाक कर रहा है बुरा मत मानियेगा हम लोग मारुति सुजुकी सत्या ऑटोमोबाइल्स में काम करते है। उसके बाद मैं अपना हेड फ़ोन निकाला गाने सुनने लगा अब सब चुप थे ट्रैन भी अपनी रफ्तार पकड़ चुकी थी मेरा दोस्त खिड़की वाली सीट छोड़ कर चला गया तो मैं उस तरफ खिसक गया इस गर्मी में जोर से हवा जब मुझे छू रही थी तो बहुत ही सुकून मिल रहा था। और इसी तरह सारा सफर कट गया हमारी आधुनिकता ने हमारी मानुसिक जीवन शैली पर बहुत बुरा असर डाला है वहाँ खचाखच लोग भरे हुए थे पर बहुत कम लोग ही थे जो आपस मे घुल मिल रहे थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे मैं उनमे से नही था। मैं भी चुप चाप बैठे हुए गाने सुनता रहा सामने बैठी वो लड़की भी शायद ऊब गयी होगी या फिर वो अपने ही ख्यालो में खोई होगी। मेरे साथ एक प्रॉब्लम है और वो ये की मैं पुरुषों से तो अच्छे से घुल मिल जाता हूँ उनसे अच्छे से डील कर लेता हूँ लेकिन लड़कियों के मामले में फिसड्डी हूँ। हा बेबाक बात करने और लोगो से मिलने जुलने में मेरा दोस्त आगे है जिसका एक छोटा सा नमूना इस सफर में आप देख ही चुके है। मैं डायरेक्टली लड़कियों से डील नही कर पाता मुझे शर्म आती है साथ ही जिझक कि सामने वाला मेरे बारे में क्या सोचेगा हा इंडिरेक्टली मेरी सोशल मीडिया पे बहुत से फ्रेंड है जो लड़किया या महिलाएं है। अब भी जब मुझे वो सफर याद आता है तो यही सोचता हूँ कि वो कौन थी?

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© 2017 Md Danish Ansari

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4 विचार “वो कौन थी…….&rdquo पर;

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