बग़ावत-अंतिम भाग

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बग़ावत इसके वजूद से तबाही होती है
इसकी तलाश अधूरी होती है
ये वो प्यास है जिसे वफ़ा मिटा सकती है
ये वो आग है जिसे मोहब्बत बुझा सकती है
मैंने देखा है मेरे अपने ही वजूद में
एक बग़ावत सुरु हो चुकी है
जो अगर तेरी खुशियों का दामन थाम लेती है
तो उसे जला कर राख कर देती है
बग़ावत नफ़्स की आरज़ू है जिसे दफ़्न मैंने किया
कभी ये आरज़ू मेरी अपनी भी हुआ करती है
तुझसे मिलकर तुझे अपनी बाहों में भर कर
सारी दुनिया से तुझे चुरा ले जाने की जिद है
मैं जानता हूँ ये ख्वाहिश ऐसी है
जो मुझे कुछ पलों की खुशी दे सकती है
ये तेरी दुनिया मे आग लगा कर मुझे
कुछ देर के लिए रोशन कर सकती है
न पूछो इन कुछ पलों की खातिर
मैं किस हद्द तक गुजर सकता हूँ
जब अपनी रूह को तलाशता हूँ तो ख्याल आता है
तेरी खुशी में ही मेरी खुशी की रज़ा है
मेरे नफ़्स मुझपे हावी होकर मुझे बहकाते है
अब मुझसे बग़ावत करवाना चाहते है
वो चाहते है मैं अपनी खुशी को तावज्जु दूँ
पर ये मेरी खुशी नही न मेरी हसरत
ये तो नफ़्सो की हसरत है जो इसे मेरा बताते है
हर वक़्त इनसे लड़ना पड़ता है
थोड़ी सी ढील से पछताना पड़ता है
अब इनपर कुछ काबू फिर से आने लगा है
इनकी बग़ावत फिर से नाकाम होता जा रहा है
इनकी आस अब डूबती जा रही है
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मेरे नफ़्स ये सोचते थे कि वो बाग़ी बना देंगे मुझे
पर मैं तो खुद एक जिहादी हूँ तेरे इश्क़ में
मेरे रब ने भी मुझे इजाजत दे रखा है
अपने नफ़्सो से जिहाद करो इसमें मेरी भी रज़ा है
अब देखो न मोहब्बत निभाते निभाते
कब मैं खुदा का सुक्र गुजार हो गया
अनजाने में ही सही मैं उसके करीब हो गया
सच ही कहा है किसी ने जिसे सच्ची मोहब्बत हो
वो गुनाह कर ही नही सकता
क्योकि वो रब की हिफाजत में जो है
दुनिया वाले क्या देख पाएंगे तेरी मेरी मोहब्बत को
रूहानी मोहब्बत को देखने के लिए अंधा होना पड़ता है
सुक्र है मेरे रबूल आलमीन सुक्र है
आज फिर तूने मुझे उसकी जिंदगी तबाह करने से बचा लिया
मैं हर दर्द लेकर जी सकता हूँ यहाँ मगर
उसकी नज़रो में गिर गया तो मर ही जाऊँगा
अपने नफ़्स से जिहाद करना तूने मुझे बताया
रूहानी मोहब्बत से रूबरू तूने कराया
जो मकाम पे अपने न पहुँची हो ये मोहब्बत
मुझे यकीन है इसमें भी तेरी कोई रज़ा है
शायद तू मुझे कुछ सिखाना चाहता है
शायद तू मुझे कुछ बताना चाहता है
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© 2017 Md. Danish Ansari
अल्लाह ने इंसान के नफ्स को इस बेहतरीन तरीके से बनाया कि वो बुराई और अच्छाई में साफ़ फर्क महसूस कर लेता है, जब कोई इंसान कोई नेक काम करता है तो उसे अन्दर से एक ख़ुशी महसूस होती है एक सुकून वो अपने अन्दर महसूस कर सकता है,
और जब कोई इंसान शुरू में किसी बुरे काम का इरादा करता है तो उसके दिल में एक खटक सी पैदा होती है वो खटक बहुत कीमती है,
कुरआन हमें बताता है कि जो इंसान दिल की इस आवाज़ की कद्र करता है तो इसमें और ज्यादा बहतरी आती है, और जो इंसान इस आवाज़ की कद्र नहीं करता तो धीरे धीरे यह आवाज़ बंद हो जाती है फिर इंसान उस गुनाह को गुनाह महसूस नहीं कर पाता,
अल-कुरआन: यह अल्लाह की हिदायत है जो उसने हर इंसान के अन्दर रखी है यह एक तराज़ू की तरह है जिसमे हर अमल तौल कर देखा जा सकता है यह इतनी कीमती चीज़ है कि अल्लाह ने फ़रमाया है कि जिसने इसे सवारा वो कामयाब हो गया और जिसने इसे दबाया वो बर्बाद हो गया.
– (सूरेह 91 शम्स, आयत: 7-10)
इंसान इस दुनिया में कई तरह की आजमाइशों में मुब्तला है। एक तरफ शैतान नेकी के रास्ते में बैठ कर उसे रोकता है और दूसरी तरफ नफ्स उसे फंदा डाला होता है कभी नफ्स की ख्वाहिशात और चाहते ऐसी होती हैं जो इंसान को अल्लाह तआला से दूर ले जाती है और कभी शैतान का बहकावा और मक्र ऐसा होता है जो इंसान को वरगलाता रहता है।
इस दुनिया में इंसान इम्तेहान की हालत में है। हर वक्त उसे खैर और शर की कुवतें बुलाती रहती हैं। क्योंकि शैतान और नफ्स के शर के साथ-साथ नेक लोग भी इंसान को नेकी की तरफ बुलाते हैं और शैतान और उसके नुमाइंदे लज्जते दुनिया की तरफ बहकाते है।
यही वजह है कि इंसान के इस भूल जाने की वजह से ही तो अल्लाह तआला फरमाते हैं कि ऐ मेरे बंदो! तुम किद्दर जा रहे हो? तुम्हारी मंजिल तो कहीं और थी और तुमने अपनी उम्मीदों का मुंतहा किसी और को बना लिया है। तुम ने अपना मकसूद और अपना माबूद किसी और को समझ लिया है।
तुम्हें तो अपने परवरदिगार की पूजा करनी चाहिए थी लेकिन तुम नफ्स की पूजा करने में लग गए। ‘ऐ बनी आदम! क्या हमने तुमसे अहद नहीं लिया था?’ कि ‘तुम शैतान की इबादत न करना।’ ‘वह तुम्हारा जाहिर बाहर दुश्मन है।’ ‘और तुम फकत मेरी इबादत करना’ यह बिल्कुल सीधा रास्ता है।
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7 विचार “बग़ावत-अंतिम भाग&rdquo पर;

      1. आपके शब्दों में उर्दू का टोन होता है इसलिए थोड़ा अर्थ समझने में मुझे सोचना पड़ता है। आप कन्फ्यूज करते मेरी आदत ऐसा है कि हर अर्थ समझना चाहती हूं।

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