बग़ावत-भाग दो

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बस एक तू ही है जिसपे मुझे भरोसा है
बाकी सबने मुझसे बग़ावत की है
अब तुम्हारी यादों को ही देख लो
कई बार कहा इनसे मुझपे हावी न हुआ करो
लेकिन ये हर बार मुझसे बग़ावत करते है
मेरे बनाये दीवारों को सलाखों को हर बार
चालाकी से ये तोड़ और लांघ जाया करते है
दिल को हुक्म दे रखा है जब बग़ावत हो
तू अपनी धड़कने की रफ्तार धीमी रखा कर
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बग़ावत की आवाज़ हर नफ़्स तक न पहुँचे
ये दिल भी बाग़ी निकला औरों की तरह
जब बग़ावत होती है तो यह जोरो से धड़कता है
जैसे युद्ध मे जोर जोर से नंगाड़े बजा करते है
धक धक की आवाज़ हर नफ़्स में परवाज़ करती है
नफ़्स को ललकारती कि बग़ावत करो बग़ावत करो
जिन नफ़्सो पे मैंने सालो से हुकूमत की है
उनके बग़ावत की सोच कर मैं काँप जाता हूँ
इन बेशर्म आंखों को देखो मुझसे बग़ावत करके
कैसे जाम पे जाम छलकाए जा रहे है
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इस क़दर छलका रहे के मेरा सीना तर ब तर हो रहा है
मेरा जलाल इस क़दर के वो भाप बनके उड़ रहा है
मेरे कान हर वक़्त सिर्फ तेरे आवाज़ सुनने को तरस रहे
इन बागियों को कोई और आवाज़ अच्छी ही नही लग रही
जबां की बग़ावत भी इनसे कोई कम नही है
इसे सिर्फ तेरे हक़ में खुशियों की दुआ मांगने की इज़ाजत दे रखी है
आज वो तुझसे मिलने की दुआ और फरियाद कर रहा है
अगर ये बाते मैं किसी और से कहूँ तो कहेगा बड़ा ज़ालिम हूँ मैं
मगर वो सिर्फ तू ही तू है जो मेरे दरे हक़ीक़त से वाकिफ होता है
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मुझे याद आता है वो वक़्त
तेरे शहर छोड़ जाते वक्त मैंने तुझसे सिर्फ एक बार कहा था
अब मेरी तरफ पीछे मुड़ कर न देखना तुझे क़सम है मेरी
और तूने मेरे उस क़सम की लाज रखी है
फिर कभी तूने मेरी तरफ पलट कर देखा तक नही
मुझे याद उसी वक़्त तूने भी मुझे एक क़सम दी थी
की मुझसे नज़रे हटा कर किसी और में दिल लगा लूँ
आज जब मैं अपने हालात देखता हूँ तो हर तरफ
सिर्फ बग़ावत ही बग़ावत मुझे नज़र आती है
पर वादा है तुझसे के हर बग़ावत को अपने पैरों तले कुचल दूँगा
फिर चाहे मैं कितना ही बेहरम क्यो न हो जाऊँ
मैंने पहले भी अपने वादों और कसमो की लाज रखी है
मैं हर मुसीबत से निपटा हूँ और अब इससे निपटूंगा
क्योकि अब ये वादे और कसमे ही तो है
जिन्हें निभाना मेरी ज़िंदगी का दूसरा मकसद बन गया है
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© 2017 Md. Danish Ansari
हम सभी की ज़िंदगी मे ऐसा वक़्त या कोई वाकया होता है जिसमे किये गए वादे या कसमे हमे और हमारे नफ़्सो को जकड़ने लगता है ऐसे हालात में जब हम उसपे अपना काबू चाहते है तो वो बाग़ी हो जाते है और अगर हम उन वादों और कसमो की लाज रखना हो तो उन बग़ावत और उन बागियों का सर कुचलना होता है पर इसमें भी हमे ही तकलीफ होती है।
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9 विचार “बग़ावत-भाग दो&rdquo पर;

  1. बस एक तू ही है जिसपे मुझे भरोसा है
    बाकी सबने मुझसे बग़ावत की है
    अब तुम्हारी यादों को ही देख लो
    कई बार कहा इनसे मुझपे हावी न हुआ करो
    लेकिन ये हर बार मुझसे बग़ावत करते है—क्या बात —-वाह—-बहुत खूब लिखा।

    Liked by 1 व्यक्ति

  2. І knoѡ a sport we are abⅼe to play thats ljke Daddy iѕ
    talking about.? Mommy mentioned making both boys ned to
    know the game a lot. ?It?s called ?What іs the smartest thing about God.
    And eacһ of us has to giѵe you one really good thing we liқe about God.
    Who wɑnts to goо first?? Lee and Larry jumped
    and shouted ?ME ME!? waving their arms in the air like they doo aat schoߋl.
    Finally, Mommy stated, ?Properly Lee, since you might be tԝo
    minutes oldedr than Larry, you may go first.

    Liked by 1 व्यक्ति

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