बग़ावत-भाग एक

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आज दिल को सुकून नही है
एक बैचेनी मुझे जला रही है
तेरी याद तो हमेशा मुझसे लिपटी रही
ऐसा कभी मुझे महसूस हुआ नही
क्या सब ठीक है ना तेरे शहर में
कोई जुल्म तुझपे हुआ तो नही
या फिर सिर्फ ये मेरे दिल की बेकरारी है
या कही कोई मुझसे खता हुई तो नही
तेरी यादों का क्या करूँ इसे संभालू
या दफ़्न कर दूँ तू मुझे बताती भी तो नही
ये हवा आज मेरा साथ नही दे रही
इस जिश्म की सारी ताक़त ये निचोड़ रही
मुझे याद करो मुझे याद करो
दुआ में अपने हाँथ उठाओ फरियाद करो
शायद मेरा रब मुझसे खफा है
मेरे हक़ में दुआ करो दुआ करो
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मैं जल कर ख़ाक हो रहा हूँ
मुझे तेरी यादों में जलना क़बूल है
तेरी यादों से जुदा हो कर जीना मुमकिन नही
मैंने कभी तुझसे अपनी मोहब्बत का हक़ नही मांगा
अब कुछ मांगता हूँ मुझसे अपनी यादों को जुदा होने न दो
मेरे रगों में लहू बन के अपनी यादों को बेहनो दो
उसे मेरे जिश्म की हर नफ़्स तक पहुचने दो
उसे बेहनो दो इस तरह की वो मुझे भिगो दें
मेरे रूहे ज़मीन को बारिश की तरह सींच दो
आज रूह की बेकरारी बढ़ती ही जा रही है
आज इसकी प्यास की तड़प बढ़ती ही जा रही है
आज दिल को सुकून नही है
एक बैचेनी मुझे जला रही है
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ये शम्स की रोशनी जो मुझे अच्छी लगती है
आज इसकी तपिश मुझे जला रही है
मेरे शहर के ये दरख्ते जो साथी रहे है
आज न जाने क्यों बेतहाशा हंसे जा रहे है
ये मौसम न जाने क्यों ऐसा लगता है
जैसे कोई गहरी साजिश रच रहा है
इसकी फितरत में मुझे बदलाओ नज़र आने लगे है
अब ये वो नही रहा जो ये कभी हुआ करता था
इसकी वफादारी पे अब मुझे शक होता है
अब इसकी वफादारी शायद बदल चुकी है
मगर क्यो, क्यो ये मुझसे अपना रुख बदल रहे है
क्या मैं इनका गुनहगार हूँ या किसी की साजिश
चाहे जो भी हो इतना तय है मेरी वफादारी तेरी तरफ है
एक बात तय है मैं जल रहा हूँ ख़ाक हो रहा हूँ
पता नही और कितनी देर खुद को संभाल रखूँ
आज दिल को सुकून नही है
एक बैचेनी मुझे जला रही है
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© 2017 Md. Danish Ansari
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9 विचार “बग़ावत-भाग एक&rdquo पर;

  1. बहुत ही अच्छा लिखा है। वारिश की इतनी अच्छी कहानी अब बगावत शिर्षक पर आ गई वाह अंसारी जी। वैसे सावन अर्थात वारिश का मौसम दोबारा आने वाला है। वैसे मेरे ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद लाइक आया है। मुझे आप लोगों से सीखने के लिये कमेंट की आशा लगी रहती है।

    Liked by 1 व्यक्ति

      1. अरे दानिश जी मैं जानती हूँ आप कैसे हो। मैंने आपको नहीं कहा है बस आपके बहाने किसी और को समझाना चाह रहे थे। प्लीज आप ऐसा मत सोचिए। फिर भी कुछ गलत कह दिया हो तो मुझे माफ कीजिएगा।

        Liked by 1 व्यक्ति

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