कुछ न कहो…….

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कुछ न कहो कुछ भी न कहो, मेरे लब जो तेरे लब से लगे
इनको तुम अब जुदा न करो, कुछ न कहो कुछ भी न कहो
तेरा साथ जो पा लिया, तेरा हाँथ जो थाम लिया
आंखों में बसा के तुम्हे, अपने दिल मे उतार लिया
तूम जो आ गए हो तो, इस दिल को करार आ गया
कुछ न कहो कुछ भी न कहो, तेरी पायल जो खनके
मेरा दिल यूँ धड़ धड़ धड़के, मुझे इस तरह घायल न करो
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तेरी गंगन जो खनके, मेरा मन यूँ बार बार मचले
तेरी याद जो आये मुझे, बस कुछ न कहो कुछ भी न कहो
तेरी बिंदिया जो चमके जैसे चांद यूँ चम चम चमके
तेरी चुनरी जो सर सर सरके हवा को मदमस्त कर दे
तेरी याद आये मुझे, कुछ न कहो कुछ भी न कहो
ऐसे तिरछी निगाहों से न देखो कुछ तो रहम कर दो
घायल दिल हाय मेरा इसको कुछ तो करार दे दो
कुछ भी न कहो कुछ भी न कहो
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© 2017 Md. Danish Ansari
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11 विचार “कुछ न कहो…….&rdquo पर;

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