मेरा अक्श…….

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देखो मुझे गौर से तुमसे नफरत करते करते इस हद्द तक गुज़र चुके है
की कोई मोहब्बत से बात भी कर ले तो क्लेज़ा चिर देने को चाहता है
उसकी निगाह तेज तर्रार है पर तेरे हर वार के सामने उसकी धार कम है
वो शायद मरहम लगाना चाहती है मेरे दिल पे पर उसे पता है ऐसी कोई दवा नही है
दिल पे लगे जख्म अगर भर जाए तो दिल लगाना आसान होता है
अच्छा है के जख्म गहरा है वरना जख्म भर जाता तो बेवफाई की सज़ा है
तुम आबाद हो और आबाद रहोगे मेरी सदा यही दुआ है
तुझपे जो कभी कोई मुसीबत आये तो उसे मेरी दुआओं का सामना करना है
इतना आसान नही है मेरी दुआओं के असर को खत्म कर पाना
जिन्हें मैंने हर नमाज़ में खुदा से रूबरू होकर अपनी झोली में मांगा है
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कभी जो याद आ जाऊँ तुझे तेरे ख्यालो में तो बस इतना कर देना है
फिज़ां में हांथ उठा के सलाम पेश कर देना है वो बादे सबा मेरे खालिक की वफादार है
मेरा खालिक मोहब्बत करने वालो के पैग़मो को ज़ाया होने नही देता है
तूम जानती हो मैंने तुम्हे कभी भी बेवफाई का लक़ब नही दिया है
कोई तुझे बेवफा कहे यह बात मुझ पर नाक़ाबिले बर्दास्त होती है
तूम मेरी रूह में उतर चुकी तुम्हारी मोहब्बत की खुशबू मुझे मिलती है
धीमे धीमे मध्धम मध्धम मेरी हर एक सांस के साथ में बिखरती है
दिल्लगी तो बेशक कर लूं मैं मगर यह सच है मोहब्बत कर नही सकता
मोहब्बत रूह तलक से जा मिलती है अब उससे किसी और को मिलाऊँ कैसे
ये इश्क़ है नादां दिल्लगी नही जो बार बार किया करते है
जो मेहबूब ने कह दिया तो बस कह दिया बस वही सुबहों शाम किया करते है
मुझे तेरे इश्क़ पे ज़र्रा भर शक न था न है और न कभी होगा
जमाना लाख कहे तुझे बेवफा मेरे लिए पर मैं और तुम हर सच जानते है।
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न जाने वो कैसे लोग होते होंगे जो अपनी मोहब्बत पर शक कर बैठते है मैंने तो करीब से जाना है उसे और हर सच उसका वो अगर आईना है तो मैं उसमे अक्श हूँ।
© Md. Danish Ansari
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8 विचार “मेरा अक्श…….&rdquo पर;

  1. मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है। बच्चों ने ब्लॉग बना दिया है। आप के ब्लॉग खोलने पर स्टेटस टाइप का चार लाइन लिख के आता है। अबाउट me में जो पडा है वो ही दिखाता है या अलग से कुछ डालना होता है। क्या मेरा ब्लॉग ओपन करनेपर आप लोगों को स्टेटस दिखता है। यदि अलग से कुछ डालना चाहती हूँ। मेरे इमेल पर या कमेन्ट द्वारा समय मिले तो हेल्प करें। मेहरबानी होगी आपकी।

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