बारिश 5…….

PicsArt_05-19-12.18.06
कैसे हो? बस ठीक हूँ तुम्हारी दुआ से। इसी लिए कहती हूँ मुझसे लड़ा मत करो पर तुम मानो तब न। सच कहा तुमसे कोई नही जीत सकता। काफी बाते हुई फिर वो अपने घर चले गई एक हफ्ते बाद रविवार को वो घर आई। रेहान चलो कहीं घूमने चलते है बहुत दिन हुए कहीं गए नही और बाते भी नही की। वैसे कहा चलना है मैडम ये तो बताओ बस यही पार्क चलते है थोड़ा सैर सपाटा भी हो जाएगा और कुछ बाते भी। ठीक है चलो हम दोनों पार्क में घूमते हुए बाते कर रहे थे। फिर वो रुकी और बोली तुम यहीं रुको मैं अभी आई कही जाना मत। ठीक है पर तुम जा कहा रही हो बस एक मिनट यही रुकना जाते हुए उसने मुझे ये कहा और वो चली गयी। काफी देर के बाद वो वापस आई। तो चले? मैंने पूछा कहा। घर और कहा इडियट। ओ ठीक है चलो वैसे भी काफी देर हो गया है घर से निकले हुए। हम दोनों पार्क से निकले और घर चल दिये दूसरे दिन मैं रोज़ की तरह ऑफिस के लिये निकल ही रहा था कि मैंने देखा गेट पे एक गुलाब और कार्ड लटका हुआ है मैंने उसे वहां से उठाया और जैसे ही कार्ड को ओपन करने वाला था कि संगीता सामने से एकाएक आ खड़ी हुई मैंने उसे फट से छुपा लिया अपने पीछे पर वो देख ली। क्या छुपा रहे हो मुझसे दिखाओ। कुछ भी तो नही या खुदा अगर इसने देख लिया तो पता नही क्या करेगी फिर से। मैं दिखाने से मना करता रहा। तभी वो बोली नमस्ते आंटी जी। ये सुन कर मैं पीछे मुड़ा और वो उस कार्ड पर झपट पड़ी। रुको उसे खोलना मत। ओ हो बड़ी तड़प उठ रही है मैं भी तो देखूं किसने भेजा है इसे तुम्हारे लिए। प्लीज उसे मत खोलो प्लीज मेरी खातिर। अच्छा बाबा अब इतना ही कह रहे हो तो नही खोलती लेकिन वादा करो इसमें जो भी लिखा होगा तुम मुझे बताओगे वैसे भी तुम इस तरह के मामले में बिल्कुल उल्लु हो। किस तरह के मामले में। यही कार्ड और गुलाब के मामले में। अच्छा तुमने तो पीएचडी कर रखी है ना। और नही तो क्या। अच्छा प्रोफेसर मैडम अब दो भी वरना बताऊंगा कैसे की इसमें क्या लिखा है। लो खोलो इसे। मैं जैसे ही उसे ओपन किया फिर उसे तुरंत बंद कर दिया। अच्छा बताओ क्या लिखा है इसमें? बस यही आल द बेस्ट लिखा हुआ है। रेहान एक बताओ तुम इंटरव्यू के लिए जा रहे हो ? नही तो। एग्जाम देने? नही। तो फिर तुम्हे कोई आल द बेस्ट का कार्ड क्यो भेजेगा सच बताते हो या बुलाऊँ आंटी जी को। आंटी आंटी। अरे चुप कर जा बताता हूँ ले देख ले खुद। वो झट से उसे ले कर खोली उसमे लिखा था आई लव यु रेहान। ओ तेरी कब से चल रहा है ये सब। क्या ?क्या चल रहा है? यही आई लव यू आई लव यू टू। मुझे नही पता मुझे तो बस पहले गुलाब आते थे फिर खत आने लगे अब ये पहली बार है कि गुलाब के साथ कार्ड भी आया है अरे मैं तो ये भी नही जानता कि ये कौन भेजता है मुझे। झूट मत बोलो। अब भला मैं क्यो झूट बोलने लगा। तुम मुझे बताना नही चाहते इसलिए। अगर मुझे बताना न होता तुम्हे तो ये कार्ड तुम्हे क्यो देता भला। ये भी सही है अच्छा तुमने कभी कोशिश की ये पता लगाने की ये कार्ड तुम्हे कौन भेजती है। मुझे नही पता अब हटो मुझे ऑफिस के लिए देर हो रहा है। बात से बचने की कोशिश मत करो यार मुझे सच मे लेट हो रहा है। अच्छा ठीक है अभी जाओ लेकिन ऑफिस से आने के बाद इस बारे में तुमसे बात करूंगी। ठीक है अब हटो। मैं ऑफिस चला गया अजीब बात है आज वो मुझसे लड़ाई नही की इतनी बड़ी बात जानने के बाद भी चलो अच्छा ही है। रात को मैं घर लौटा तो महारानी घर पर ही थी तुम यहा क्या कर रही हो। अरे ये तुम क्या कह रहे हो अब ये हमारे यहाँ आ भी नही सकती क्या या इसके लिए तुमसे इजाजत लेगी तुमसे? मेरे कहने का ये मतलब नही था अम्मी बस इसे इस वक़्त यहाँ देखने की उम्मीद नही थी। देख रहे हो आंटी आप का बेटा अब भी मुझसे नाराज़ है एक तो मैंने इसे माफ किया और ये मुझसे इस तरह से बात करता है। हा बड़ी मेहरबानी अम्मी खाना निकालो भूख लगी है मैं फ्रेश होकर आता हूँ। तुम भी खाना खा कर जाना वरना बाद में बोलोगी खाने को भी नही पूछा।  रहने दो मैं इतनी भी भुकी नही हूँ। नही बेटी खाना खा कर ही जाना वैसे भी इसका क्या ये तो है ही ऐसा अम्मी मुझे ये समझ नही आता तुम मेरी माँ हो या इसकी। संगीता जोर से हसने लगी। अब इसमें कौन सी हसने वाली बात है। कुछ नही अभी अभी जो तुमने आंटी से कहा वही बात मैं अपनी माँ से भी बोलती हूँ तुम्हे ले कर।खाना खाने के बाद काफी देर तक हमारे बीच उस कार्ड को लेकर बहस होती रही अब मैं खुद ही नही जानता था कि वो कार्ड मुझे कौन भेज रहा है तो भला उसे क्या बताता। फिर अम्मी आई बोली क्यो संगीता आज घर नही जाना बेटा तुम्हे ? हाँ आंटी जी बस जा ही रही हूँ। जाओ बेटा रेहान इसे घर छोड़ आओ जी अम्मी चलो मैडम। हम पैदल ही निकल गये।
PicsArt_05-19-12.13.12
वाकई तुम नही जानते कि तुम्हे ये कार्ड कौन भेजता है? नही। तुम क्या महसूस करते हो इसे लेकर ? कुछ भी नही। क्या तुम किसी और से मोहब्बत करते हो? क्या हम   किसी और टॉपिक पे बात कर सकते है? नही। मुझे बताओ कोई और है जिससे तुम मोहब्बत करते हो। मैं तुम्हारे सवालों का जवाब नही देना चाहता। सोच लो वरना मैं तुमसे बात नही करूंगी फिर कभी? यार तुम हर बार इतनी जिद्दी क्यो हो जाती हो। तो बता क्यो नही देते। हाँ मैं किसी और से मोहब्बत करता हूँ लेकिन अब ये मत पूछना किससे क्योकि मैं इसका जवाब नही दूंगा चाहे फिर तुम नाराज़ ही क्यो न हो जाओ। क्योकि मैं जिससे मोहब्बत करता हूँ उससे कभी कहाँ नही पता नही वो कैसे रियेक्ट करे साथ ही वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त भी है डर ये है कि कहीं दोस्ती ही न खत्म हो जाये। तुम डरते बहुत हो उससे अपने दिल की बात कह कर तो देखो वो न नही कहेगी। जब उसने ये बात कही तो एक पल के लिए मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मैं उससे कह दूँ जैसे वो भी मुझसे प्यार करती हो पर मैं कह न सका दोस्ती को खो कर मोहब्बत को हासिल करना मुझे गवारा नही। कभी कभी हमारी दोस्ती हमारी मोहब्बत पर भारी पड़ती है और कभी मोहब्बत हमारी दोस्ती पर ये हम पर निर्भर करता है के हम किसको सबसे ज्यादा तवज्जो देते है। यूही दिन बीतते गए कई कार्ड आये पर मैंने कोई जवाब न दिया साल बीते फिर संगीता की शादी के लिए रिस्ते ढूंढे जाने लगे फिर रिस्ता भी पक्का हो गया और सगाई भी। मैं अब टूट कर बिखरना सुरु हो चुका था अंदर ही अंदर। वो मुझसे हर बार पूछती तुम उदास क्यो हो अगर कोई बात है तो मुझसे कह क्यो नही देते इस तरह से तुम अंदर ही अंदर कब तक घुटते रहोगे। कह दो मुझसे। अरे कुछ नही हुआ मुझे बस ऑफिस के काम का टेंशन है और कुछ नही । मैं ठीक हूँ तुम बस इस पल का मज़ा लो । मज़ा लूं कैसे मेरा बेस्ट फ्रेंड यहाँ उदास बैठा है और मैं मज़े करूँ।अगर ऐसा है तो आज से तुम्हे मेरे चेहरे पर सिर्फ मुस्कान ही नज़र आएगी । वादा करते हो कि तुम हमेशा खुश रहोगे कभी अपने चेहरे से ये मुस्कान को नही हटने दोगे? वादा अब देखना मैं तुम्हारी शादी में कैसे धूम मचाता हूँ तुम्हारी शादी सबके लिए यादगार होगी और खास कर हम दोनों के लिए ।
वादा करना तो आसान था मेरे दोस्त
मेरी दिल से पूछो जरा तुम।
वादों को निभाते निभाते अपने बर्दास्त
की हर हद्द से गुजर चुका हूँ।।
____________________________________________________________________________________________
बारिश का यह पांचवा भाग है उम्मीद है आप सबको इसके पहले के भागों की तरह यह भाग भी पसंद आएगा।
Md. Danish Ansari
Advertisements

15 विचार “बारिश 5…….&rdquo पर;

  1. कभी समय मिले तो पढकर मेरी रचना कैसी लगी तीन चार दिन से मैं कुछ नया नहीं लिख पायी आप के ब्लॉग के चक्कर में। वैसे मैंने नये फालो वर्ष के लिए ही पुरानी रचना को शेयर कर पब्लिश किया है। बताना न भूलें कैसा लगा?

    Liked by 2 लोग

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s