बारिश 4…….

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समय बीतता गया हमारी अच्छी दोस्ती हो गयी मैं उससे काफी प्रभावित हुआ मुझे महसूस हो गया था कि मैं उसकी तरफ आकर्षित हो रहा हूँ। जो सही नही था आखिर हम दोस्त है वो मेरे बारे में भला तब क्या सोचेगी जब उसे पता चलेगा कि मैं उसकी तरफ आकर्षित हो रहा हूँ वो हमेशा के लिए हमारी दोस्ती तोड़ देगी। मुझे ये गवारा नही मैंने हमारी दोस्ती को बचाने का एक ही तरीका था अपने और उसके दरमियां एक लकीर या दीवार बना दूँ जिससे वो मेरे इतने करीब ही न आ सके कि हमारी दोस्ती खतरे में पड़ जाये। मैं उससे मिलना जुलना कम कर दिया उसे अब देखते ही नज़रे चुरा कर वहा से निकल जाता सड़क पे कभी वो मिल जाती तो कभी कभार ही उसकी मदद करने आगे आता ज्यादा तर तेजी से वहा से गुज़र जाता। इतना सब कुछ करने के बावजूद में उससे दूर नही जा पा रहा था। वो हर वक़्त मेरे दिमाग मे ख्यालो में हद्द हो गयी यार मतलब ये तो पागलपन है। पूरे डेढ़ साल हो चुके हमारी दोस्ती को कुछ भी हो जाये मैं इसे किसी भी कीमत पर टूटने नही दूंगा। मैंने धीरे धीरे खुद पर काबू पा ही लिया ये सच है की मैं अब भी उसकी ही ख्यालो में जीता रहा हूँ लेकिन कभी उसे भनक नही लगने दिया हमारी दोस्ती पहले से ज्यादा घनिष्ट हो चुकी थी अब तो हम एक फैमिली की तरह पेश आने लगे थे शादी हो जन्मदिन हो या कोई त्यौहार मेरी और उसकी फैमिली एक दूसरे के घर आने जाने लगी थी लेकिन इतने सालों में एक दिन भी ऐसा नही गुज़रा जब मैंने उसके बारे में न सोचा हो। कभी कभी मुझे ऐसा लगता जैसे वो भी मेरे लिए वही फील करती है जो मैं उसके प्रति करता हूँ पर मैंने यह सोचा ये भ्रम हो सकता है क्योंकि मैं उसके बारे में जो फील करता हूँ जो मैं चाहता हूं शायद मेरा दिमाग भी मुझे वही महसूस करा रहा था जो मैं करना चाहता था। मैंने अपनी सीमा बनाये रखी ये एक तरफ मुहब्बत बहूत भारी पड़ रही थी मुझ पर मैं उसके साथ हो के भी उसके साथ नही था क्योकि मैंने खुद को खुद के अंदर बांध रखा था। बहुत मुश्किल होता है जब आप किसी से इश्क़ तो करते है पर उसे जाहिर नही कर सकते उसे जता नही सकते जब कि वो शख्स हर वक़्त आपके साथ रहता हो। वो हमेशा मुझसे लड़ती और मुझे उसे मनाना पड़ता जब कि ज्यादातर मेरी गलती नही भी होती थी पर मैं वो करता क्योकि उससे ज्यादा दिनों तक रूठे रहना मैंने कभी सीखा ही नही उसे हमेशा इस बात की शिकायत रहती के तुम उससे क्यो बात करते हो वो अच्छा/अच्छी नही है इससे मत मिलो उससे मत मिलो और हमेशा मैं ये कहता मैं क्यो बात नही कर सकता जैसे तुम मेरी दोस्त हो वैसे ही बाकी सब भी है वैसे भी मैं सिर्फ तुम्हारा दोस्त हूँ। तो अब तुम उनके लिए मुझसे झगड़ा करोगे। झगड़ा मैं कर रहा हूँ कि तुम कर रही हो इतनी छोटी सी बात का बार बार बतंगड़ क्यो बना देती हो। अच्छा तो मैं झगड़ा कर रही हूं हा ठीक है तो आज अभी इसी वक्त से तुम अपनी शकल मत दिखाना तुम मुझे और मुझसे बात भी मत करना। ठीक है अच्छा है नही दिखाऊंगा तुम्हे अपना चेहरा। मुझे कोई शौक नही है तुम्हे अपनी शकल दिखानी की और मैं कौन सा तुझसे बात करने को मरे जा रहा हूँ। आप यकीन नही करोगे हम दोनों जब लड़ते तो दो खतनाक दुश्मनों की तरह लड़ते थे मुझे मैदान छोड़ना पड़ता हमेशा क्योकि वो हमेशा लड़ती और जो मिलता उसे चला के दे मारतीमैं जाने के लिए मुड़ा तो उसने मुझे अपनी सैंडल फेक के मारी थी वो भी पीछे से कभी कभी तो मन करता एक घुमा के दूँ पर ये ख्याल सिर्फ गुस्से में था। उस दिन के बाद हम दोनों एक दूसरे से बात नही किये वो अगर मेरे घर आती भी किसी काम से तो मैं घर से बाहर निकल जाता और अगर वो मुझे देख लेती तो मुँह फैर लेती पर उसकी कमी मुझे महसूस होती हमेशा हमारे घर वाले भी हम दोनों की इस लड़ाई से काफी परेशान थे क्योकि ये लड़ाई और नाराजगी काफी लंबी चल रही थी पूरा गर्मी पार हो चुका था और हमने बात नही की आखिर उसने भी तो गलती की है उसने मुझे सबके सामने सैण्डल उतार के फेक के मारा था। हम दोनों के घर वालो ने एक दूसरे को बहुत समझाया पर हम नही माने फिर मेरी माँ ने मुझे समझाया और बोली माफी मांग लेने से तुम छोटे या वो बड़ी नही हो जाएगी। ये बात तो उसपे भी लागू होती है ना अम्मी वो भी तो माफी मांग सकती है। उसने कभी माफी मांगी है जो अब तुमसे मांगेगी।अगर वो नही मांगेगी तो मैं भी नही मांगने वाला वो मुझे ऐसे ट्रीट करती है जैसे मैं उसका दुश्मन हूँ इससे बात मत करो उससे मत मिलो वो अच्छी नही है ये अच्छा नही है हर बार मैं उसकी बात क्यो मानू। तुम कह तो सही रहे हो पर जो तुम कर रहे हो वो सही नही है क्या मुझे नही दिखता जब से तुम दोनों की लड़ाई हुई है तुम किसी से बात नही करते ठीक से खाते भी नही रात रात भर जागते रहते हो तुम्हारे दिल मे जो है उसे कह दो बेटा वरना ये नाराजगी कहीं तुम दोनों को हमेशा के लिए एक दूसरे से अलग न कर दे। मैं जानती हूं कि तुम उससे मोहब्बत करते हो पर कहोगे नही ताकि तुम्हारी दोस्ती न टूट जाये लेकिन तुम दोनों जो कर रहे हो उससे भी तुम्हारी दोस्ती तो टूट ही रही है ना। आपको कैसे पता कि मैं उससे ? मैं तुम्हारी माँ हूँ तुम्हारी आंखे पढ़ लेती हूँ। मैं बाद मे काफी सोचता रहा फिर एक दिन उसके घर गया माफी मांगने के लिए पर उसने मेरी एक न सुनी और मुझे घर से बाहर कर दी मैं भी ठान लिया या तो आज माफ करेगी या फिर यही भूक हड़ताल उसके घर के बाहर पेड के नीचे अपनी बाइक पे बैठा रहा शाम होते ही धड़ाधड़ बारिश होने लगी मैं वही जमा रहा। अंकल आंटी आये मुझे घर जाने को कहने लगे मैंने उनसे घर जा रहा हूँ  करके निकला और जब वो घर चले गए तो वापस उसी जगह आके खड़ा हो गया। और वो बेरहम खम्बख़त ये भी नही की थोड़ा खिड़की खोल के देख ले कि मैं ज़िंदा हूँ या मर गया।रात के करीब 11:30 या 12:00 बजे होंगे बारिश रुक गयी तब जा के कहीं उसने खिड़की से बाहर देखी और बाहर आई। तुम पागल हो जो बारिश में भीग रहे हो अभी के अभी घर जाओ वरना मैं बता रही हूं तुम्हे बहुत पिटूंगी। मैंने गाल आगे कर दिया। बड़े बेशर्म हो गए हो जब से उन दोस्तो से मिले हो बत्तमीजी पे उतर आए हो। तुमने मुझे माफ़ किया कि नही? नही। तो फिर ठीक है मैं यही रात भर खड़ा रहूँगा तुम जाओ। पागल मत बनो ठीक है वरना मैं बता रही हूं बहुत पिटूंगी मैं तुम्हे। तो रोका किसने है आज या तो माफी मिलेगी या फिर यही खड़ा रहूँगा देखता हूँ कब तक माफी नही देती। यार चल ठीक है मैंने माफ किया अब जा। पक्का माफ की। हाँ पक्का। फिर मैं घर आ गया। बारिश में देर तक भीगने की वजह से मुझे बुखार और शर्दी हो गयी सुबह महारानी मेरे घर आई।

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**बारिश का चौथा भाग** आप सबने “#बारिश” को पसंद किया उसे सहारा मुझे अच्छा लगा उम्मीद है बाकी सभी भागों की तरह चौथा भाग भी आपको पसंद आये।

Md. Danish Ansari

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19 विचार “बारिश 4…….&rdquo पर;

      1. मेरी राय मानिए तो ज्यादा मत खीचिये सिरियल की तरह से नहीं तो बोरियत होती है। आपअपने विचार को स्पष्ट किजिए और भाावनाओं को व्यक्त करते हुए दोस्त का किरदार स्पष्ट कर दीजिए शाटकट में। वैसे मुझे जहाँ तक लगता है कि दोस्त एक ही है। रोल अलग अलग है और सही रिश्ता का नाम डिसाइड कर पाने के कारण कल्पना करने लगे हैं।

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