बारिश………

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मैंने उसे पहली दफा तब देखा जब मैं खिड़की से बाहर झाक कर बारिश का मज़ा ले रहा था। जम की बारिश हो रही थी हांथ में किताब लिए वो बस दौड़ी आयी हमारे घर के अहाते में बाहर दरवाजे पे वो खड़े होकर कर खुद को सहजने की कोशिश कर रही थी। मैं बस उसे देखता रहा न उसे अंदर आने को कहा और न ही उसने दरवाज़े पे दस्तक दी। आप लोग भी सोच रहे होंगे कि कितना गलीज़ इंसान है कि एक लड़की की मदद भी नही किया यकीन मानो यही बात मैंने खुद भी अपने लिए उसके जाने के बाद सोचा, पर मुझे कहा पता था कि मेरी ये खता ही हमारे दोस्ती की पहली वजह बनेंगी। दूसरी दफा मैंने उसे चौपाटी पे देखा वो अपने सहेलियों के साथ पानी पूरी खा रही थी मुझे पानी पूरी पसंद नही मैं अपने दोस्तों के साथ एग रोल पे कॉशनट्रेट कर रहा था दोस्तो के साथ कुछ अपना अलग ही मज़ा है। तभी एकाएक दुपट्टा एग रोल पे आ पड़ा मेरा हांथ खिंचाया और एग रोल ज़मीन पे गिरा धम चीड़ के देखा तो वो सामने थी थोड़ा सा भय और माफी के लहजे में इससे पहले की मैं कुछ कहता उसने इशारा किया मेरी तरफ मैं कुछ समझा नही और अपने चारों तरफ देखने लगा पता नही क्या देखने की कोशिश कर रहा था। वो धीरे से आगे बढ़ी और मेरे हांथ की घड़ी से फंसी अपने दुपट्टे को रिहा करा के सॉरी बोल के चली गयी। मैं पागल मूरत बना बस खड़ा रहा फिर से हम दोस्त अपनी बातों में मशगूल हो गए।
रविवार का दिन था ऑफिस की छुट्टी थी सुबह से आज बारिश हो रही थी रुक रुक के, मैं घर के अंदर बैठे हुए मोबाइल पे दोस्तो से बात कर रहा था तभी घर की बेल बजी मैं उठा कि माँ आगे बढ़ गयी दरवाजे की तरफ मैं फिर से बैठ गया। माँ किसी को अंदर आने को कहती हुई उसे बैठक में ले गयी।   अफ़ज़ल तौलिया देना माँ की आवाज़ आयी मुझे लगा शायद कोई पहचान का आदमी आया होगा तो तौलिया ले कर आगे बढ़ा देखा तो वही लड़की सामने खड़ी थी। मैं उसे देख कर चौका और वो मुझे शायद हम दोनों को ही इसकी उम्मीद नही थी। माँ ने उसे तौलिया दिया और मुझे बुलाते हुए अंदर चली गयी मैं उनके पीछे साथ हो लिया चाय बनाकर मुझे पकड़ाते हुए बोली जा उस लड़की को दे आ मुझे शर्म आयी मैंने मना कर दिया माँ हड़काते हुए बोली चुप चाप चाय दे आ मुझे रसोई में काम है वरना में खुद दे आती चल जा। इन सभी के दौरान मेरा मोबाइल कॉल पे ऑन था सारी बाते दोस्त सुन रहा था। मैंने कॉल कट किया और चाय लेकर बैठक की तरफ बढ़ा जो देखा सो देखते ही रह गया…….।।।
बाप रे उसके बाल कितने लंबे थे पहले तो मैंने कभी गौर ही नही किया उफ्फ उसके भीगे बाल क़यामत।
वो मुड़ी और मुझे देखी मैं संभला नही और गरम चाय छलक के हांथो पे गिरी कप गिरने ही वाला था के वो आगे बढ़ कर कप थाम ली……संभाल के जली तो नही। हांथ झटक के न में सर हिला दिया मैंने उसे बैठने को कहा वो बैठ गयी और चाय के लिए सुक्रिया अदा की और बोली…। उस दिन आपका एग रोल मेरी वजह से गिरा उसके लिए माफ करना सॉरी। उसकी माफी आप उसी वक़्त मांग चुकी है अब इसकी जरूरत नही कुछ देर बाद बारिश रुकी और वो चली गयी।
To be Continue………………
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कुछ हफ़्तों से सोच रहा था कि मैं कुछ लिखूं मेरा मतलब है स्टोरी तो आज से आप लोगो के लिए उपलब्ध होगी उम्मीद है आपको ये कहानियाँ वाली addition पसंद आएगी।
Md. Danish Ansari
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14 विचार “बारिश………&rdquo पर;

  1. मैंने अपने ब्लॉग पर गानों के माध्यम से भूमिका बना रियल कहानी से जोड़ने की कोशिश की है। मैं कल्पना कर नहीं जोड़ पाती। अब देखिए कहानी बनती है कि नावेल या आत्म कथा। लिखने की शैली कैसी है जरूर सूचित करें।

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