भाई …………

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भाई क्या होता है इसका जवाब कैसे दूँ
असमंजस में हूँ आश्चर्य में हूँ
भाई क्या होता इसमें क्या कहूँ कैसे कहूँ
वो भाई है जो मेरे लिए खड़ा हुआ तब
जब मैं दसवीं फैल हो गया मैं तनाव में हूँ
हर रोज़ हर पल बुरे ख्याल मुझे ज़गड़ते है
मैं अंधकार में घसीट लिए जा रहा हूँ
मैं जीवन की हर उम्मीद हार चुकां हूँ
मुझे न कुछ सूझ है ना मैं कुछ बुझ रहा हूँ
बस घनघोर अंधकार में जगड़ता जा रहा हूँ
एक छोटी सी लौ के लिए बिलख रहा हूँ
पर अंधकार इतना घनघोर है के मुझे
आशा की लौ दिखती ही नही मैं मर रहा हूँ
सारे रिस्ते मुझे पराये से लग रहे है
जो अपने है जैसे मैं इन्हें जानता ही नही हूँ
इन रिस्तो से मुझे नफरत सी हो रही है
मुझे घुटन महसूस हो रही है माँ मैं कैसा हूँ
क्या मैं बहुत बुरा हूँ या नाकाबिलियत हूँ
बहन क्या मैं एक बुरा भाई हूँ
अगर नही तो मुझे समझते क्यो नही तुम
मेरे अंदर झांको मैं मर रहा हूँ मैं मर रहा हूँ
कोई तो इस अंधकार में मेरा हांथ थामो लो
कोई तो मुझे निकाले इस अंधकार से
पिता जी आप भले ही बाहर से कठोर हो
पर यह सच है आज भी मैं आपका लाड़ला हूँ
आप क्यो मुझे पहचान नही रहे मैं आपका अंश हूँ
हा भूल हुई है मुझसे पर पिता जी मुझे संभालो
मैं मर रहा हूँ लोग मुझ पर हंस रहे है
आइए और मुझे संभालिये इससे पहले की
मैं हमेशा के लिए इस अंधकार में खो जाऊँ
मेरा अंत नज़दीक है मैं मर रहा हूँ………..
बस करो सब अब एक और लफ्ज़ भी कोई कुछ नही कहेगा…….
अंधकार में मुझे ये शब्द सुने अपनी बोझल आंखों से
मैंने खुद की और बढ़ते एक लौ को देखता हूँ
और फिर वो सम्पूर्ण अंधकार को चीर के
उज्ज्वल प्रकाशमान हो चुका है और मैं खड़ा हूँ
अपने ही अपराध बोध में लिपटा हुआ
एक कोने में सिसक रहा हूँ आँख भारी है
उसमे अश्क़ डबडबा रही है सिर झुकाए खड़ा हूँ
“””इससे फर्क नही पड़ता के तुम गिर चुके हो
फर्क इससे पड़ता है के तुम फिर खड़े होना चाहते हो या नही”””
ये शब्द सुन के मुझे कुछ महसूस हुआ मैंने सिर उठा
देखा तो पता चला वो मेरा भाई था मेरा बड़ा भाई
जिससे मैंने अब तक सिर्फ नफरत की माँ का चहेता होने से
आज वो मुझे सबसे प्रिय लगा खुद अपने आप से
“”””मुझमें विश्वास जगा और मैं आगे बढ़ा और कहाँ
मैं हार नही मानूंगा मैं फिर से पढूंगा और इस बार
प्रथम आ कर उन सब को ये बता दूंगा की मैं
उनसे अलग नही हूँ अगर वो कर सकते है तो मैं क्यो नही
मैं उन सब को ये बता दूंगा जो वो कर सकते है
मैं उस काम को उनसे बेहतर कर सकता हूँ
मेरे भाई ने कहा तो देर किस बात की उठ खड़ा हो
और भाग तब तक मत रुकना जब तक तुझे तेरी
मंज़िल न मिल जाए””””
तेरे पैरों से चाहे लहू बहे या उनमे छाले ही पड़ जाए
रुकना मत बस आगे बढ़ और उन सबको बता
जो तू है सो है लेकिन तू खुद को बेहतर बना
मैं पढ़ा पूरा तन और मन लगा के पढ़ा और
प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया मेरा विश्वास बढ़ गया
आज मैं बेहतर हूँ सबसे बेहतर तो नही पर कम नही
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Dedicated Our Big Brother Love You Always & Thank You For Every Thing
Md. Danish Ansari
कहना चाहता हूँ अंधकार हम सभी के जीवन मे है
पर उम्मीद की किरण भी है बस उसे सही वक्त पर उसका हांथ थाम लो और दृढ़ निश्चय करके आगे बढ़ो। ये मैने इसलिए लिखा है कि 10वी के परिणाम आ चुके है और 12वी के भी आने वाले है आत्म हत्या की घटना बढ़ रही है अपनी उम्मीद साथ मत छोड़ना अगर उस दिन मैंने अपनी उम्मीद का हांथ न थामता तो शायद आज में ये शब्द न लिख रहा होता मैं किसी 4 या 5 फिट के गड्ढे में सड़ गल गया होता।
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भाई …………&rdquo पर एक विचार;

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